शहाजी महाराज की अचानक एंट्री और जिजाऊ के आंसू!
शहाजी महाराज की अचानक एंट्री और जिजाऊ के आंसू!
श्रीमान योगी रणजित देसाई जी द्वारा लिखित एक ऐतिहासिक उपन्यास है जो छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और उपलब्धियों पर आधारित है। यह पुस्तक शिवाजी महाराज के साहस, रणनीति, और प्रशासनिक कौशल को उजागर करती है। शिवाजी महाराज ने हिंदवी स्वराज्य की स्थापना का सपना देखा और उसे साकार किया। उन्होंने मुगलों और अन्य शासकों के खिलाफ संघर्ष किया, लेकिन अपने राज्य के सभी निवासियों के साथ समान व्यवहार किया, चाहे वे किसी भी धर्म के हों।
श्रीमान योगी का परिचय
शिवाजी महाराज की मां रानी जिजाबाई का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव था, और उन्होंने अपने बेटे को एक महान योद्धा और नेता बनने के लिए प्रेरित किया। रणजित देसाई जी ने इस पुस्तक में शिवाजी महाराज के जीवन के विभिन्न पहलुओं को बारीकी से चित्रित किया है, जिससे पाठक उनके समय और संघर्षों को महसूस कर सकते हैं।
यह केवल एक ऐतिहासिक उपन्यास नहीं है बल्कि यह भारत के इतिहास, संस्कृति और स्वाभिमान की कहानी है। इस पुस्तक में शिवाजी महाराज के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं को विस्तार से बताया गया है।
श्रीमान योगी के लेखक के बारे में
रणजित देसाई जी मराठी साहित्य के एक प्रसिद्ध लेखक थे। उन्होंने भारतीय इतिहास और महान व्यक्तित्वों पर आधारित कई प्रसिद्ध रचनाएँ लिखीं। उनकी लेखन शैली बहुत ही प्रभावशाली और प्रेरणादायक मानी जाती है।
श्रीमान योगी उनकी सबसे प्रसिद्ध कृति है जिसमें उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन को बहुत ही जीवंत और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया है।
पिछले ब्लॉग में?
पिछले ब्लॉग में हमने पढ़ा की बाल शिवाजी अपने परिवार—मां रानी जिजाबाई, दादी और सेविकाओं—के प्यार में पल रहे थे। उनके लिए खिलौने लाए जाते और उनकी देखभाल बड़े ध्यान से की जाती थी। एक शास्त्री ने उन्हें साधारण पीतल का कड़ा पहनाने की सलाह दी, यह मानते हुए कि इससे बालक का स्वभाव अधिक सुदृढ़ बनेगा।
धीरे-धीरे बाल शिवाजी बढ़ने लगे—हंसना, पहचानना और रेंगना सीखने लगे। दुर्ग में मौसम के बदलाव और संभावित कठिनाइयों को देखते हुए अनाज का भंडारण भी किया गया।
इसी बीच खबर आती है कि शहाजी महाराज दुर्ग पर आने वाले हैं। रानी जिजाबाई और दुर्ग के सभी लोग उनके स्वागत की तैयारी में लग जाते हैं। अंत में शहाजी महाराज दुर्ग पर पहुंचते हैं और सब लोग उनका आदरपूर्वक स्वागत करते हैं।
कुल मिलाकर, यह भाग बाल शिवाजी के बचपन, पारिवारिक स्नेह और शहाजी महाराज के आगमन की उत्सुकता को दर्शाता हैं।
पिछे पढ़ें. . .
इस लेख में क्या पढ़ेंगे?
- श्रीमान योगी पुस्तक का विस्तृत सारांश
- प्रमुख पात्र और उनका परिचय
- ऐतिहासिक महत्व
- इस पुस्तक से मिलने वाली सीख
- निष्कर्ष
- विशेष संवाद
- FAQ
श्रीमान योगी पुस्तक का विस्तृत सारांश
७-२
शहाजी महाराज का दुर्ग में आगमन
विश्वासराव ने कहा, ‘एक उड़ने वाली खबर थी ; इसलिए मैं दुर्ग के नीचे नहीं आया। क्षमा किजिए।’
‘व्यही द्वारा इस तरह की बात करना हम पसंद नहीं करते... क्या, नाइक ? ठीक है ?’
‘जी !’
सभी भवन में आ गए। नौकर परेशान हो गए। शहाजी महाराज ने हाथ-पैर धोए। महापुरुषों ने भी हाथ-पैर धोए। सभी लोग बैठक पर बैठ गए। विश्वासराव ने पूछा,
रास्ते की चर्चा
‘क्या रास्ते में कोई परेशानी नहीं हुई ना ?’
महाराज दिल से हंसे। कहा,
‘विश्वासराव, घुड़दौड़ और दौड़ना इतना अभ्यस्त हो गया है कि रात में भी हम घोड़े पर सवार रहते हैं।’
सब हंसे। हंसते हंसते रुक गए। बाल शिवाजी राजे भीतर के द्वार से रेंगते हुए निकले। सभी की निगाहें प्यारे बच्चे पर थीं। बाल शिवाजी राजे को देखते हुए महाराज ने कहा,
बाल शिवाजी राजे का प्रवेश
‘छोटे राजे, आओ ! हम आपसे मिलने आए थे।’
बाल शिवाजी राजे ने एक बार सबकी ओर देखा। उसके चेहरे पर मुस्कान आई; और छलांग लगाते हुए वह शहाजी महाराज की ओर भागा। शास्त्री ने कहा,
पिता-पुत्र का स्नेह
‘खूनने खून पहचाना।’
शहाजी महाराज ने शिवबा को प्यार से उठाया। उन्होंने चूम लिया और उसे अपनी गोद में ले लिया। बाल शिवाजी राजे अपने पिता की दाढ़ी हिला रहे थे। विश्वासराव ने मुस्कुराते हुए कहा,
‘दाढ़ी को छूने वाला पहला वीर देखा।’
‘नहीं। यह दूसरा। लेकिन हम इस धारणा के तहत हैं कि छोटे राजे आज्ञा पत्र के साथ आए थे।’
‘आज्ञापत्र’
‘हम अंदर जाते हैं।’
रानी जिजाबाई और शहाजी महाराज की भेंट
शहाजी महाराज उठे; वह बाल शिवाजी राजे को भीतरी चौक में ले गए। रानी जिजाबाई को देखते हुए शहाजी महाराज ने कहा,
‘जैसे ही हमें देखा हमारे पास आया।’
‘यह निडर है। जब एक आदमी को परख लिया, तो वह पास जाता है।’
शहाजी महाराज दफ्तर पर बैठने गए। मुस्कुराते हुए रानी जिजाबाई ने कहा,
‘सास इंतज़ार कर रही है।’
‘यहां आने में दिक्कत हो रही थी। रास्ता दिखाएं।’
शहाजी महाराज ने उमाबाई के दर्शन किए। जब रानी जिजाबाई और शहाजी महाराज ने शांति से मुलाकात की, तो उन्होंने पूछा,
‘सब ठीक है ना ?’
रानी जिजाबाई की आंखों में आंसू जमा हो गए। आंसु बाहर आ गया। आसन से उठकर शहाजी महाराज ने कहा,
राजनीतिक परिस्थिति
‘रानी साहब, हमें भी संदेश मिला। हम इस बात से भी दुखी हैं कि मामा साहब की इस तरह हत्या की। हम उस संदेश को लेकर चिंतित थे। यह सच था कि हमारी दुश्मनी थी, पर वो आपसी। लेकिन विदेशियों ने की हुई दखल को हम कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं ? यही वजह से भड़के ; और हमने निजामशाही को छोड़ दिया और आदिलशाही की नौकरी ले ली।’
प्रमुख पात्र और उनका परिचय
- शहाजी महाराज भोसले - मराठा साम्राज्य के महान योद्धा और छत्रपति शिवाजी महाराज के पिता। वे उस समय दक्खन की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे।
- बाल शिवाजी राजे - भविष्य के महान राजा छत्रपति शिवाजी महाराज का बचपन। इस प्रसंग में उनका साहस, निडरता और अपने पिता के प्रति प्रेम दिखाई देता है।
- रानी जिजाबाई - शिवाजी महाराज की माता, जिन्होंने उन्हें धर्म, साहस और स्वराज्य का आदर्श सिखाया।
- उमाबाई - शहाजी महाराज की माता, जिनके दर्शन के लिए शहाजी महाराज भीतर गए।
- विश्वासराव - दुर्ग के विश्वस्त सरदार, जो शहाजी महाराज के स्वागत और व्यवस्था में लगे थे।
श्रीमान योगी का ऐतिहासिक महत्व
यह प्रसंग मराठा इतिहास में अत्यंत भावनात्मक और महत्वपूर्ण है। इसमें बाल शिवाजी राजे और उनके पिता शहाजी महाराज की मुलाकात दिखाई देती है। यह घटना उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों और परिवार की कठिनाइयों को भी उजागर करती है।
इस पुस्तक से मिलने वाली प्रमुख सीख
- परिवार का प्रेम और संबंध जीवन की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं।
- संकट के समय भी धैर्य और साहस बनाए रखना चाहिए।
- महान व्यक्तित्व बचपन से ही अपने गुणों के संकेत देने लगते हैं।
निष्कर्ष
बाल शिवाजी राजे और शहाजी महाराज की यह भेंट केवल एक पारिवारिक मिलन नहीं थी, बल्कि यह भविष्य में उभरने वाले महान नेता के बचपन की झलक भी थी। इस प्रसंग से हमें शिवाजी महाराज के व्यक्तित्व की प्रारंभिक छवि देखने को मिलती है।
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