लखुजीराव जाधव की हत्या का रहस्य: रानी जिजाबाई पर टूटा कहर
लखुजीराव जाधव की हत्या का रहस्य: रानी जिजाबाई पर टूटा कहर
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| लखुजीराव जाधव की हत्या का रहस्य: रानी जिजाबाई पर टूटा कहर |
महल में अजीब सा सन्नाटा था। रानी जिजाबाई को महसूस हो रहा था कि कुछ भयानक छुपाया जा रहा है।
जब उन्होंने विश्वासराव को बुलाकर सच जानने की ठानी, तो जो सामने आया उसने उनकी दुनिया ही उजाड़ दी।
उनके पिता, लखुजीराव जाधव, जिन्हें वे अपना सबसे बड़ा सहारा मानती थीं, एक भयानक साजिश का शिकार हो चुके थे।
दौलताबाद के दरबार में सम्मान के नाम पर बुलाकर उन्हें और उनके बेटों को बेरहमी से मार डाला गया। यह सिर्फ एक हत्या नहीं थी, बल्कि एक परिवार, एक शक्ति और एक विश्वास का अंत था।
रानी जिजाबाई का मन आक्रोश, पीड़ा और अविश्वास से भर गया। उनके शब्दों में दर्द साफ झलक रहा था—क्या इस दुनिया में न्याय बचा है? क्या भगवान सच में हैं?
इस घटना ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी।
अब उनके सामने सिर्फ एक सवाल था—इस अन्याय का बदला कैसे लिया जाएगा? लेकिन क्या यह अंत था… या किसी बड़े तूफान की शुरुआत?
यह जानने के लिए अंत तक बने रहे।
पिछले लेख में?
पिछले लेख में हमने पढ़ा की अकाल से जूझती धरती… भूख से तड़पती प्रजा… और उसी बीच एक ऐसा निर्णय, जिसने एक निर्दोष की जान बचा ली — लेकिन यह तो बस शुरुआत थी।
रानी जिजाबाई ने दया दिखाकर एक अपराधी को जीवनदान दिया, पर उन्हें क्या पता था कि आने वाले पल उनकी दुनिया हिला देंगे। शांत शाम, सुंदर जुन्नर का दृश्य… सब कुछ सामान्य लग रहा था। तभी एक खबर बिजली की तरह गिरी — पुणे जल चुका था! मुरार जगदेव ने शहर को राख में बदल दिया था।
दिल संभल भी नहीं पाया था कि एक और आघात आया — अपने ही परिवार पर हमला, अपहरण, अपमान… और चारों ओर फैलता भय।
महल का हर चेहरा बदल गया… हंसी गायब, आंखों में डर और दिल में अनकहा रहस्य।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी बाकी था…
क्या यह सब यहीं खत्म हो जाएगा? या यहीं से शुरू होगा एक ऐसा इतिहास, जो पूरी दुनिया बदल देगा?
आगे क्या हुआ… यह जानने के लिए पूरी कहानी पढ़े।
इस लेख में क्या पढ़ेंगे?
लेख का विस्तृत सारांश
४-३
भवन में छिपी चिंता
वह सहना रानी जिजाबाई से असहनीय हो गया। उन्होंने विश्वासराव को बुलाया।
‘विश्वासराव...’
‘हां, रानी साहब।’
‘हम केवल रिश्ते या अधिकार से आपकी शरण में नहीं आये हैं। आप हमारे लिए भाई जैसे हैं। इसलिए हमने आपका यहां रहना स्वीकार कर लिया।’
‘हम जानते है।’
‘तो आप हमसे क्या छिपा रहे हैं ?’
सच्चाई छुपाने की कोशिश
‘कुछ नहीं, रानी साहब।’ विश्वासराव ने असमंजस से कहा, ‘किसने कहा ?’
‘कहना क्यों चाहिए ? पिछले दो दिनों से कोई भी सीधे तौर पर कुछ नहीं बोल रहे है। बस हमें देखकर ही घबरा जाते हैं।’
‘गलतफहमी हो रही है, रानी साहब...’
‘विश्वासराव, हमने भी चार मानसून देखे हैं। आघात सहे है। यदि आप मुझसे कुछ नहीं कहेंगे तो हम इस भवन में एक क्षण भी रहना नहीं चाहते।’
‘लेकिन, मां साहब...’
‘डरो मत ! इस जिजाऊ ने बहुत झेला है। जो भी कहोगे, उसे सहन करने की शक्ति है हम में। लेकिन कल्पना में जीना मुश्किल होता जा रहा है।’
‘मां साहब...’
सत्य का सामना
‘बताओSSS...’
विश्वासराव की आंखों से आंसू निकले।
‘विश्वासराव, इन आंसू को नियंत्रण में लाओ।’ जिजाऊ, जो जल्दी में थे, वह दीवार के सहारे खड़े हो गए और आदेश दिया, ‘बोलो...’
विश्वासराव ने आंसू पोंछे, वे जल्दी में बोल गए,
‘हमारे आबासाहेब... लखुजीराव जाधव की हत्या कर दी गई।’
‘हत्या ? आबा की हत्या ? ये किसने किया ?’
जिजाऊ कड़ी आंखों से विश्वासराव को देख रहे थे। विश्वासराव के पास शब्द नहीं थे। वे अपने होठों से जीभ लटकाकर बात करने लगे,
हत्या का षड्यंत्र
‘लखूजीराव दौलताबाद के सुल्तान से मिलने दरबार गए थे। उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि यह साजिश पहले रची गई थी। वह अपने तीन पुत्रों अचलोजी, राघोजी, यशवंतराव के साथ सुल्तान के समक्ष गये। मुजरा हुआ और सुल्तान दरबार से चला गया। लखुजीराव के लिए सुल्तान का यह व्यवहार नया था। मतलब समझा नहीं। इतना ही...’
‘बोलो, विश्वासराव। अब एक क्षण भी प्रतीक्षा न करो...’
‘...और वही तलवारें खींच ली गईं। विरोध करने का कोई अवसर नहीं मिला। सिर्फ जंबी से विरोध करेगा, वो भी कितना ? मां साहब, सुल्तान की सेवा में चारों जाधव ध्वस्त हो गए। मां के साथ रहने वाले बहादुरजी उतने ही जीवित रहे। आपके देवर जगदेवराव किले के नीचे थे, बच गए।’
रानी जिजाबाई का दर्द और क्रोध
विश्वासराव ने सिर उठाया। रानी जिजाबाई मूर्ति की भांति दीवार के सहारे टिकी हुई थी। आंखें भी सूजी हुई थीं। उनके चेहरे पर एक डरावनी मुस्कान थी। विश्वास राव के कानों में सूखे शब्द पड़ रहे थे...
‘आबा चले गए ! मेरा मायका ख़त्म हो गया। पुणे में अपने ही लोगों ने विदेशियों के लिए गधा हल घुमाया। हम जिनके दरबार में सेवक हैं, वे हमारी बेटियां भगा रहे हैं। और जिनके बल पर सुलतान को खड़ा होना चाहिए, उन जाधवरावों की सुलतान के दरबार में ही कत्ल हो गई !’
- और अचानक रानी जिजाबाई चिल्लाए,
‘विश्वासराव, क्या इस दुनिया में कोई भगवान है, हां ?’
रानी जिजाबाई, जो दीवार के सहारे खड़ी थीं, उसी जगह फर्श पर बैठ गई। जब विश्वासराव ने संभाला, तो रानी जिजाबाई बेहोश थीं। महल में हंगामा मच गया।
आधी रात के करीब महल में फिर रोना-पीटना शुरू हो गया।
आगे की कहानी?
क्या रानी जिजाबाई इस अन्याय का बदला लेंगी? क्या यह घटना शिवाजी महाराज के भविष्य को प्रभावित करेगी? जानने के लिए जुड़े रहें...
प्रमुख पात्र और उनका परिचय
- रानी जिजाबाई – मराठा साम्राज्य की महान माता, जिनका जीवन संघर्ष और साहस से भरा था।
- लखुजीराव जाधव – रानी जिजाबाई के पिता, एक वीर और सम्मानित सरदार।
- विश्वासराव – रानी जिजाबाई के विश्वासपात्र, जिन्होंने दुखद समाचार सुनाया।
लेख का ऐतिहासिक महत्व
लखुजीराव जाधव की हत्या मराठा इतिहास की एक महत्वपूर्ण और दुखद घटना थी। यह घटना उस समय के राजनीतिक षड्यंत्रों और सत्ता संघर्ष को उजागर करती है। जाधव परिवार, जो मराठा शक्ति का एक प्रमुख स्तंभ था, उसके इस प्रकार के विनाश ने मराठा समाज को गहराई से प्रभावित किया। इस घटना ने रानी जिजाबाई के मन में अन्याय के खिलाफ एक गहरी आग जलाई, जिसने आगे चलकर शिवाजी महाराज के स्वराज्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस लेख से मिलने वाली प्रमुख सीख
- यह घटना हमें सिखाती है कि सत्ता और राजनीति में विश्वासघात आम बात है।
- कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और साहस बनाए रखना आवश्यक है।
- रानी जिजाबाई की तरह, हमें भी अन्याय के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा लेनी चाहिए।
निष्कर्ष
लखुजीराव की हत्या केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं थी, बल्कि एक युग का अंत था। इस घटना ने रानी जिजाबाई को अंदर से झकझोर दिया, लेकिन यही पीड़ा आगे चलकर एक महान क्रांति की नींव बनी।
विशेष संवाद
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