लखुजीराव जाधव की हत्या और रानी जिजाबाई का शोक

लखुजीराव जाधव की हत्या और रानी जिजाबाई का शोक

श्रीमान योगी रणजित देसाई जी द्वारा लिखित एक ऐतिहासिक उपन्यास है जो छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और उपलब्धियों पर आधारित है। यह पुस्तक शिवाजी महाराज के साहस, रणनीति, और प्रशासनिक कौशल को उजागर करती है। शिवाजी महाराज ने हिंदवी स्वराज्य की स्थापना का सपना देखा और उसे साकार किया। उन्होंने मुगलों और अन्य शासकों के खिलाफ संघर्ष किया, लेकिन अपने राज्य के सभी निवासियों के साथ समान व्यवहार किया, चाहे वे किसी भी धर्म के हों।

श्रीमान योगी का परिचय

शिवाजी महाराज की मां रानी जिजाबाई का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव था, और उन्होंने अपने बेटे को एक महान योद्धा और नेता बनने के लिए प्रेरित किया। रणजित देसाई जी ने इस पुस्तक में शिवाजी महाराज के जीवन के विभिन्न पहलुओं को बारीकी से चित्रित किया है, जिससे पाठक उनके समय और संघर्षों को महसूस कर सकते हैं।

यह केवल एक ऐतिहासिक उपन्यास नहीं है बल्कि यह भारत के इतिहास, संस्कृति और स्वाभिमान की कहानी है। इस पुस्तक में शिवाजी महाराज के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं को विस्तार से बताया गया है।

श्रीमान योगी के लेखक के बारे में

रणजित देसाई जी मराठी साहित्य के एक प्रसिद्ध लेखक थे। उन्होंने भारतीय इतिहास और महान व्यक्तित्वों पर आधारित कई प्रसिद्ध रचनाएँ लिखीं। उनकी लेखन शैली बहुत ही प्रभावशाली और प्रेरणादायक मानी जाती है।

श्रीमान योगी उनकी सबसे प्रसिद्ध कृति है जिसमें उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन को बहुत ही जीवंत और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया है।


पिछले ब्लॉग में?

पिछले ब्लॉग में हमने पढ़ा की वह प्रसंग रानी जिजाबाई की न्यायप्रियता, करुणा और धैर्य को दर्शाता है। अकाल के समय जब चोरी की घटनाएं बढ़ रही थीं, तब उन्होंने कठोर दंड (ढलान से गिराने की सजा) रोककर मानवता और संवेदनशीलता का परिचय दिया। उनकी इसी दया से एक व्यक्ति की जान बच जाती है।

इसके बाद एक शांत क्षण में वे दुर्ग से नीचे जुन्नार का दृश्य देखती हैं, जो उनके भावनात्मक जुड़ाव को दिखाता है। उसी समय बचाया गया व्यक्ति उनके चरणों में आकर कृतज्ञता व्यक्त करता है, और रानी जिजाबाई उसे सुधार का अवसर देती हैं।

लेकिन तुरंत ही स्थिति बदल जाती है, जब मुरार जगदेव द्वारा पुणे के विनाश की खबर मिलती है। भवन जलाए जाते हैं और शहर तबाह हो जाता है। हालांकि शहाजी महाराज के सुरक्षित होने की खबर थोड़ी राहत देती है।

इसके बाद एक और दुखद समाचार आता है—परिवार की एक महिला का अपहरण—जिससे रानी जिजाबाई गहरे मानसिक आघात में चली जाती हैं। दुर्ग का वातावरण भी उदास और चिंतित हो जाता है, और सभी उनके दुःख को कम करने का प्रयास करते हैं, लेकिन उनकी पीड़ा बनी रहती है।

पिछे पढ़ें. . .


इस लेख में क्या पढ़ेंगे?

  • श्रीमान योगी पुस्तक का विस्तृत सारांश
  • प्रमुख पात्र और उनका परिचय
  • ऐतिहासिक महत्व
  • इस पुस्तक से मिलने वाली सीख
  • निष्कर्ष
  • विशेष संवाद
  • FAQ

श्रीमान योगी पुस्तक का विस्तृत सारांश

४-३

भवन में छिपी चिंता

वह सहना रानी जिजाबाई से असहनीय हो गया। उन्होंने विश्वासराव को बुलाया।

‘विश्वासराव...’

‘हां, रानी साहब।’

‘हम केवल रिश्ते या अधिकार से आपकी शरण में नहीं आये हैं। आप हमारे लिए भाई जैसे हैं। इसलिए हमने आपका यहां रहना स्वीकार कर लिया।’

‘हम जानते है।’

‘तो आप हमसे क्या छिपा रहे हैं ?’

सच्चाई छुपाने की कोशिश

‘कुछ नहीं, रानी साहब।’ विश्वासराव ने असमंजस से कहा, ‘किसने कहा ?’

‘कहना क्यों चाहिए ? पिछले दो दिनों से कोई भी सीधे तौर पर कुछ नहीं बोल रहे है। बस हमें देखकर ही घबरा जाते हैं।’

‘गलतफहमी हो रही है, रानी साहब...’

‘विश्वासराव, हमने भी चार मानसून देखे हैं। आघात सहे है। यदि आप मुझसे कुछ नहीं कहेंगे तो हम इस भवन में एक क्षण भी रहना नहीं चाहते।’

‘लेकिन, मां साहब...’

‘डरो मत ! इस जिजाऊ ने बहुत झेला है। जो भी कहोगे, उसे सहन करने की शक्ति है हम में। लेकिन कल्पना में जीना मुश्किल होता जा रहा है।’

‘मां साहब...’

सत्य का सामना

‘बताओSSS...’

विश्वासराव की आंखों से आंसू निकले।

‘विश्वासराव, इन आंसू को नियंत्रण में लाओ।’ जिजाऊ, जो जल्दी में थे, वह दीवार के सहारे खड़े हो गए और आदेश दिया, ‘बोलो...’

विश्वासराव ने आंसू पोंछे, वे जल्दी में बोल गए,

‘हमारे आबासाहेब... लखुजीराव जाधव की हत्या कर दी गई।’

‘हत्या ? आबा की हत्या ? ये किसने किया ?’

जिजाऊ कड़ी आंखों से विश्वासराव को देख रहे थे। विश्वासराव के पास शब्द नहीं थे। वे अपने होठों से जीभ लटकाकर बात करने लगे,

हत्या का षड्यंत्र

‘लखूजीराव दौलताबाद के सुल्तान से मिलने दरबार गए थे। उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि यह साजिश पहले रची गई थी। वह अपने तीन पुत्रों अचलोजी, राघोजी, यशवंतराव के साथ सुल्तान के समक्ष गये। मुजरा हुआ और सुल्तान दरबार से चला गया। लखुजीराव के लिए सुल्तान का यह व्यवहार नया था। मतलब समझा नहीं। इतना ही...’

‘बोलो, विश्वासराव। अब एक क्षण भी प्रतीक्षा न करो...’

‘...और वही तलवारें खींच ली गईं। विरोध करने का कोई अवसर नहीं मिला। सिर्फ जंबी से विरोध करेगा, वो भी कितना ? मां साहब, सुल्तान की सेवा में चारों जाधव ध्वस्त हो गए। मां के साथ रहने वाले बहादुरजी उतने ही जीवित रहे। आपके देवर जगदेवराव किले के नीचे थे, बच गए।’

रानी जिजाबाई का दर्द और क्रोध

विश्वासराव ने सिर उठाया। रानी जिजाबाई मूर्ति की भांति दीवार के सहारे टिकी हुई थी। आंखें भी सूजी हुई थीं। उनके चेहरे पर एक डरावनी मुस्कान थी। विश्वास राव के कानों में सूखे शब्द पड़ रहे थे...

‘आबा चले गए ! मेरा मायका ख़त्म हो गया। पुणे में अपने ही लोगों ने विदेशियों के लिए गधा हल घुमाया। हम जिनके दरबार में सेवक हैं, वे हमारी बेटियां भगा रहे हैं। और जिनके बल पर सुलतान को खड़ा होना चाहिए, उन जाधवरावों की सुलतान के दरबार में ही कत्ल हो गई !’

- और अचानक रानी जिजाबाई चिल्लाए,

‘विश्वासराव, क्या इस दुनिया में कोई भगवान है, हां ?’

रानी जिजाबाई, जो दीवार के सहारे खड़ी थीं, उसी जगह फर्श पर बैठ गई। जब विश्वासराव ने संभाला, तो रानी जिजाबाई बेहोश थीं। महल में हंगामा मच गया।

आधी रात के करीब महल में फिर रोना-पीटना शुरू हो गया।

प्रमुख पात्र और उनका परिचय

  • रानी जिजाबाई – मराठा साम्राज्य की महान माता, जिनका जीवन संघर्ष और साहस से भरा था।
  • लखुजीराव जाधव – रानी जिजाबाई के पिता, एक वीर और सम्मानित सरदार।
  • विश्वासराव – रानी जिजाबाई के विश्वासपात्र, जिन्होंने दुखद समाचार सुनाया।

श्रीमान योगी का ऐतिहासिक महत्व

यह घटना मराठा इतिहास की एक महत्वपूर्ण और दुखद घटना है। इसने रानी जिजाबाई के जीवन को गहराई से प्रभावित किया और आगे चलकर छत्रपति शिवाजी महाराज के व्यक्तित्व निर्माण में भी इसकी भूमिका रही।

इस पुस्तक से मिलने वाली प्रमुख सीख

  • संकट में भी सत्य का सामना करना चाहिए।
  • जीवन में धैर्य और साहस सबसे बड़ी शक्ति है।
  • इतिहास हमें अन्याय के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देता है।

निष्कर्ष

लखुजीराव जाधव की हत्या का यह प्रसंग न केवल एक पारिवारिक त्रासदी है, बल्कि यह उस समय की राजनीतिक क्रूरता को भी दर्शाता है। रानी जिजाबाई का यह दर्द आगे चलकर एक महान इतिहास की नींव बना।


विशेष संवाद


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न : लखुजीराव जाधव की हत्या कैसे हुई?

उत्तर : उन्हें सुल्तान के दरबार में बुलाकर षड्यंत्रपूर्वक मार दिया गया।

प्रश्न : इस घटना का रानी जिजाबाई पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर : इससे उन्हें गहरा मानसिक आघात पहुंचा और वे बेहोश हो गईं।

प्रश्न : यह घटना क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर : इसने मराठा इतिहास और शिवाजी महाराज के भविष्य को प्रभावित किया।

प्रश्न : श्रीमान योगी श्रृंखला कहाँ से शुरू करें?

उत्तर : आप श्रीमान योगी से सभी भाग पढ़ सकते हैं।


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